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पौध जानकारी

बरगद (Banyan)

वानस्पतिक नाम: Ficus benghalensis

बरगद भारत का राष्ट्रीय वृक्ष है, जो अपनी विशाल छाया और लटकती हुई जटाओं (हवाई जड़ों) के लिए पहचाना जाता है। यह अत्यंत दीर्घायु वृक्ष है।

मुख्य विशेषताएँ

  • विशाल फैलाव एवं घनी छाया
  • हवाई जड़ें जो नए तने बनाती हैं
  • अत्यंत लंबी आयु
  • पक्षियों हेतु प्रचुर भोजन

पर्यावरणीय महत्व

बरगद बड़े क्षेत्र में छाया, तापमान नियंत्रण एवं जैव विविधता का केंद्र बनाता है। यह अनेक पक्षी एवं कीट प्रजातियों को आश्रय देता है।

रोपण का उपयुक्त समय

वर्षा ऋतु।

रोपण की विधि

  • बहुत खुली एवं बड़ी भूमि का चयन करें।
  • बड़ा गड्ढा तैयार कर खाद मिश्रित मिट्टी से भरें।
  • पौधा लगाकर सिंचाई करें और प्रारंभिक वर्षों में सुरक्षा दें।

आवश्यक परिस्थितियाँ

मिट्टी
गहरी दोमट मिट्टी उपयुक्त; अधिकांश मिट्टियों में वृद्धि संभव।
जलवायु
उष्णकटिबंधीय एवं उपोष्ण जलवायु।
सिंचाई
प्रारंभिक वर्षों में नियमित; बाद में न्यूनतम।
धूप
पूर्ण धूप।

देखभाल

  • ट्री-गार्ड द्वारा सुरक्षा
  • थाले की निराई एवं प्रारंभिक सिंचाई

उपयोग

  • सार्वजनिक छायादार स्थल
  • ग्राम सभा जीवन पार्क एवं सामुदायिक वृक्षारोपण
  • जैव विविधता संवर्धन

उत्तर प्रदेश में उपयुक्तता

उत्तर प्रदेश के ग्रामीण सार्वजनिक स्थलों, चौराहों एवं बड़े परिसरों के लिए उपयुक्त।

ध्यान देने योग्य बातें

  • इसे बहुत अधिक स्थान चाहिए; सड़क, भवन या पाइपलाइन के निकट रोपण उपयुक्त नहीं है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

बरगद का पौधा कहाँ लगाना चाहिए?

बहुत खुले स्थान पर, जैसे ग्रामीण चौराहा, तालाब किनारा या बड़ा परिसर — भवनों से दूर।

बरगद का पर्यावरणीय महत्व क्या है?

यह विशाल छाया, तापमान नियंत्रण एवं अनेक पक्षी-कीट प्रजातियों हेतु आवास प्रदान करता है।

बरगद कितने वर्ष जीवित रहता है?

यह अत्यंत दीर्घायु वृक्ष है और उपयुक्त परिस्थितियों में सैकड़ों वर्ष तक जीवित रह सकता है।

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