पौध जानकारी
अमरूद (Guava)
वानस्पतिक नाम: Psidium guajava
अमरूद कम देखभाल में अच्छा फल देने वाला वृक्ष है और छोटे किसानों एवं घरेलू बगीचों दोनों के लिए उपयुक्त है।
मुख्य विशेषताएँ
- अपेक्षाकृत जल्दी फल देने वाला
- कम ऊँचाई, प्रबंधन में सरल
- विभिन्न मिट्टियों में अनुकूल
पर्यावरणीय महत्व
छोटे हरित क्षेत्र, पक्षी-भोजन एवं घरेलू बागवानी को बढ़ावा देता है।
रोपण का उपयुक्त समय
वर्षा ऋतु; सिंचाई उपलब्ध हो तो फरवरी–मार्च।
रोपण की विधि
- 60×60×60 सेमी गड्ढा तैयार करें।
- गोबर खाद एवं मिट्टी मिलाकर भरें।
- पौधों के बीच 5–6 मीटर दूरी रखें।
आवश्यक परिस्थितियाँ
मिट्टी
जल निकासी वाली दोमट मिट्टी उपयुक्त; अनेक मिट्टियों में सहनशील।
जलवायु
उष्ण एवं उपोष्ण जलवायु।
सिंचाई
गर्मियों में 7–10 दिन के अंतराल पर; वर्षा ऋतु में आवश्यकतानुसार।
धूप
पूर्ण धूप।
देखभाल
- वार्षिक हल्की छंटाई से अच्छी शाखाएँ बनती हैं।
- थाले की निराई एवं जैविक खाद।
उपयोग
- फल उत्पादन
- घरेलू बगीचा एवं मेड़ रोपण
उत्तर प्रदेश में उपयुक्तता
उत्तर प्रदेश में अमरूद की खेती व्यापक है और यह अधिकांश जिलों के लिए उपयुक्त है।
ध्यान देने योग्य बातें
- जलभराव से जड़ रोग हो सकते हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
अमरूद का पौधा कब लगाएं?
वर्षा ऋतु सर्वोत्तम है; सिंचाई उपलब्ध हो तो फरवरी–मार्च में भी लगाया जा सकता है।
अमरूद के पौधों के बीच कितनी दूरी रखें?
सामान्यतः 5–6 मीटर; सघन रोपण पद्धति में यह दूरी कम हो सकती है।
क्या अमरूद की छंटाई जरूरी है?
हल्की वार्षिक छंटाई पौधे का आकार सुधारती है और नई शाखाओं के विकास में सहायक होती है।